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mahabharat 13.15.50: आश्रम के चारों ओर का जंगल रुरु, बंदर, शार्क, शेर, तेंदुए, हिरण, मोर, बिल्ली, सांप, विभिन्न प्रजातियों के हिरणों के झुंड, भैंस और भालू से भरा हुआ था।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  13.15.50 
रुरुवानरशार्दूलसिंहद्वीपिसमाकुलम्।
कुरङ्गबर्हिणाकीर्णं मार्जारभुजगावृतम्।
पूगैश्च मृगजातीनां महिषर्क्षनिषेवितम्॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
आश्रम के चारों ओर का जंगल रुरु, बंदर, शार्क, शेर, तेंदुए, हिरण, मोर, बिल्ली, सांप, विभिन्न प्रजातियों के हिरणों के झुंड, भैंस और भालू से भरा हुआ था।
 
The forest around the hermitage was filled with Ruru, monkeys, sharks, lions, leopards, deers, peacocks, cats, snakes, herds of deer of different species, buffaloes and bears. 50.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)