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mahabharat 13.15.43: अपने ज्येष्ठों की आज्ञा पाकर मैंने गरुड़ का ध्यान किया। वे आए और मुझे हिमालय ले गए। वहाँ पहुँचकर मैंने गरुड़ से विदा ली।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  13.15.43 
प्राप्यानुज्ञां गुरुजनादहं तार्क्ष्यमचिन्तयम्।
सोऽवहद्धिमवन्तं मां प्राप्य चैनं व्यसर्जयम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
अपने ज्येष्ठों की आज्ञा पाकर मैंने गरुड़ का ध्यान किया। वे आए और मुझे हिमालय ले गए। वहाँ पहुँचकर मैंने गरुड़ से विदा ली।
 
After taking the orders of my elders, I contemplated on Garuda. He (came) and took me to the Himalayas. After reaching there, I bid farewell to Garuda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)