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श्लोक 13.15.429  |
वृणीष्वाष्टौ वरान् कृष्ण दातास्मि तव सत्तम।
ब्रूहि यादवशार्दूल यानिच्छसि सुदुर्लभान्॥ ४२९॥ |
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| अनुवाद |
| हे पुण्यात्माओं में श्रेष्ठ! हे यदुवंश के सिंह! हे श्रीकृष्ण! मैं तुम्हें आठ वर देता हूँ। तुम जो अत्यंत दुर्लभ वर प्राप्त करना चाहते हो, वह मुझे बताओ।॥429॥ |
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| The best of the virtuous! The lion of the Yaduvansh, Sri Krishna! I give you eight boons. Tell me the extremely rare boons you wish to obtain.'॥ 429॥ |
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इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि मेघवाहनपर्वाख्याने चतुर्दशोऽध्याय:॥ १४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें मेघवाहनपर्वका आख्यानविषयक चौदहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १४॥
(दाक्षिणात्य पाठके ४ श्लोक मिलाकर कुल ४३३ श्लोक हैं) |
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