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श्लोक 13.15.427  |
निरीक्ष्य भगवान् देवीं ह्युमां मां च जगद्धित:।
शतक्रतुं चाभिवीक्ष्य स्वयं मामाह शङ्कर:॥ ४२७॥ |
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| अनुवाद |
| जगत् के हितैषी भगवान शंकर ने उमादेवी की ओर देखा और फिर मेरी ओर देखा और फिर इन्द्र की ओर देखकर स्वयं मुझसे कहा-॥427॥ |
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| Lord Shankar, the well-wisher of the world, looked at Umadevi and then looked at me and then looked at Indra and said to me himself -॥ 427॥ |
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