श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 423
 
 
श्लोक  13.15.423 
विदित्वा सप्त सूक्ष्माणि षडङ्गं त्वां च मूर्तित:।
प्रधानविधियोगस्थस्त्वामेव विशते बुध:॥ ४२३॥
 
 
अनुवाद
विद्वान पुरुष, महत्तत्त्व, अहंकार और पंचतन्मात्रा - इन सात सूक्ष्म तत्त्वों को जानकर, आपके स्वरूप के छह अंगों का ज्ञान प्राप्त करके, मुख्य विधियोग का आश्रय लेकर आपमें प्रवेश करते हैं ॥423॥
 
Learned men, after knowing these seven subtle elements – Mahatattva, Ahamkara and Panchatanamatra, after attaining the understanding of the six* organs of your form, take the shelter of the main Vidhiyoga and enter into you. 423॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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