श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 418
 
 
श्लोक  13.15.418 
हृदयं सर्वभूतानां क्षेत्रज्ञस्त्वमृषिस्तुत:।
सर्वत: पाणिपादस्त्वं सर्वतोऽक्षिशिरोमुख:॥ ४१८॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों द्वारा स्तुति किए हुए आप समस्त प्राणियों के हृदय में स्थित क्षेत्रज्ञ हैं। आपके सब ओर हाथ और पैर हैं। सब ओर आपकी आँखें, सिर और मुख हैं॥418॥
 
Praised by the sages, you are the knower of the field situated in the heart of all beings. You have hands and feet on all sides. You have eyes, head and face on all sides.॥ 418॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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