| श्री महाभारत » पर्व 13: अनुशासन पर्व » अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन » श्लोक 413 |
|
| | | | श्लोक 13.15.413  | काम: क्रोधो भयं लोभो मद: स्तम्भोऽथमत्सर:।
आधयो व्याधयश्चैव भगवंस्तनवस्तव॥ ४१३॥ | | | | | | अनुवाद | | हे प्रभु! काम, क्रोध, भय, लोभ, मद, मूर्छा, मद, आधि और रोग - ये सब आपके शरीर हैं। | | | | Lord! Lust, anger, fear, greed, intoxication, stupor, lust, half and disease – all these are your bodies. | | ✨ ai-generated | | |
|
|