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mahabharat 13.15.411: वेद, यज्ञ, सोम, दक्षिणा, अग्नि, हवि और यज्ञ में प्रयुक्त होने वाली समस्त सामग्री, ये सब परमेश्वर के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं हैं; इसमें कोई संदेह नहीं है ॥411॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 411
 
 
श्लोक  13.15.411 
वेदाश्च यज्ञा: सोमश्च दक्षिणा पावको हवि:।
यज्ञोपगं च यत् किंचिद् भगवांस्तदसंशयम्॥ ४११॥
 
 
अनुवाद
वेद, यज्ञ, सोम, दक्षिणा, अग्नि, हवि और यज्ञ में प्रयुक्त होने वाली समस्त सामग्री, ये सब परमेश्वर के अतिरिक्त अन्य कोई नहीं हैं; इसमें कोई संदेह नहीं है ॥411॥
 
Vedas, sacrifices, Soma, Dakshina, Agni, offerings and all the materials used for sacrifices are all none other than the Supreme Lord; there is no doubt about this. ॥ 411॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)