श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 409
 
 
श्लोक  13.15.409 
त्वत्तो जातानि भूतानि स्थावराणि चराणि च।
त्वया सृष्टमिदं कृत्स्नं त्रैलोक्यं सचराचरम्॥ ४०९॥
 
 
अनुवाद
समस्त जीव-जंतु आपसे ही उत्पन्न हुए हैं। स्थावर-जंगम प्राणियों सहित इस सम्पूर्ण जगत् की रचना भी आपने ही की है ॥409॥
 
All living and non-living creatures have originated from you. You have created this entire universe including the mobile and immobile creatures. ॥ 409॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas