श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 408
 
 
श्लोक  13.15.408 
त्वं वै ब्रह्मा च रुद्रश्च वरुणोऽग्निर्मनुर्भव:।
धाता त्वष्टा विधाता च त्वं प्रभु: सर्वतोमुख:॥ ४०८॥
 
 
अनुवाद
आप ब्रह्मा, रुद्र, वरुण, अग्नि, मनु, शिव, धाता, विधाता और त्वष्टा हैं। आप सर्वोच्च व्यक्ति हैं जिसके सभी दिशाओं में मुख हैं। ॥ 408॥
 
You are Brahma, Rudra, Varuna, Agni, Manu, Shiva, Dhata, Vidhata and Tvashta. You are the Supreme Being who has faces in all directions. ॥ 408॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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