श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 405
 
 
श्लोक  13.15.405 
ततो मामब्रवीद् देव: पश्य कृष्ण वदस्व च।
त्वया ह्याराधितश्चाहं शतशोऽथ सहस्रश:॥ ४०५॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान शिव ने मुझसे कहा, 'श्रीकृष्ण! मेरी ओर देखो, मुझसे बात करो। तुमने पहले भी सैकड़ों-हजारों बार मेरी पूजा की है।'
 
Then Lord Shiva said to me, 'Sri Krishna! Look at me, talk to me. You have worshipped me hundreds and thousands of times before.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas