Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.403-404: मेरे सामने भगवान शिव खड़े थे। भरत! महादेवजी को अपने सामने खड़ा देखकर प्रजापतियों से लेकर इंद्र पर्यन्त सारा लोक मेरी ओर देखने लगा। किन्तु उस समय मुझमें महादेवजी की ओर देखने की शक्ति नहीं थी। | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पुरस्ताद् धिष्ठित: शर्वो ममासीत् त्रिदशेश्वर:।
पुरस्ताद् धिष्ठितं दृष्ट्वा ममेशानं च भारत॥ ४०३॥
सप्रजापतिशक्रान्तं जगन्मामभ्युदैक्षत।
ईक्षितुं च महादेवं न मे शक्तिरभूत् तदा॥ ४०४॥
अनुवाद
मेरे सामने भगवान शिव खड़े थे। भरत! महादेवजी को अपने सामने खड़ा देखकर प्रजापतियों से लेकर इंद्र पर्यन्त सारा लोक मेरी ओर देखने लगा। किन्तु उस समय मुझमें महादेवजी की ओर देखने की शक्ति नहीं थी।
Lord Shiva was standing in front of me. Bhaarat! Seeing Mahadevji standing in front of me, the whole world from Prajapatis to Indra started looking at me. But at that time I did not have the strength to look at Mahadevji. 403-404.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥