Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.15.401: गायन और वाद्य बजाने की कला में निपुण अप्सराएँ और गन्धर्व दिव्य लय में गाते हुए अद्भुत शक्तिशाली भगवान भव की स्तुति करने लगे ॥401॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 401
 
 
श्लोक  13.15.401 
गन्धर्वाप्सरसश्चैव गीतवादित्रकोविदा:।
दिव्यतालेषु गायन्त: स्तुवन्ति भवमद्भुतम्॥ ४०१॥
 
 
अनुवाद
गायन और वाद्य बजाने की कला में निपुण अप्सराएँ और गन्धर्व दिव्य लय में गाते हुए अद्भुत शक्तिशाली भगवान भव की स्तुति करने लगे ॥401॥
 
The Apsaras and Gandharvas, skilled in the art of singing and playing musical instruments, sang to the divine rhythm and praised the amazingly powerful Lord Bhava. ॥ 401॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)