Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.394-395: राजन! पृथ्वी, अन्तरिक्ष, नक्षत्र, ग्रह, मास, पक्ष, ऋतुएँ, रात्रियाँ, ऋतुएँ, क्षण, काल, युगचक्र और दिव्य विद्याएँ - ये सभी (मूर्ति के रूप में) भगवान शिव को नमस्कार कर रहे थे। इसी प्रकार सत्त्ववेत्ता पुरुष भी भगवान शिव को नमस्कार करते थे। 394-395॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजन! पृथ्वी, अन्तरिक्ष, नक्षत्र, ग्रह, मास, पक्ष, ऋतुएँ, रात्रियाँ, ऋतुएँ, क्षण, काल, युगचक्र और दिव्य विद्याएँ - ये सभी (मूर्ति के रूप में) भगवान शिव को नमस्कार कर रहे थे। इसी प्रकार सत्त्ववेत्ता पुरुष भी भगवान शिव को नमस्कार करते थे। 394-395॥
Rajan! Earth, space, constellations, planets, months, pakshas, seasons, nights, seasons, moments, moments, times, era cycles and divine sciences – all of them (in the form of an idol) were saluting Lord Shiva. Similarly, Sattvavetta men also used to salute Lord Shiva. 394-395॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥