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mahabharat 13.15.392: इन्द्र और वामन रूप में भगवान विष्णु, जो अदिति और ब्रह्मा के दोनों पुत्र थे, भगवान शिव की उपस्थिति में रथन्तर सामक का गायन कर रहे थे।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.392 
शतक्रतुश्च भगवान‍् विष्णुश्चादितिनन्दनौ।
ब्रह्मा रथन्तरं साम ईरयन्ति भवान्तिके॥ ३९२॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र और वामन रूप में भगवान विष्णु, जो अदिति और ब्रह्मा के दोनों पुत्र थे, भगवान शिव की उपस्थिति में रथन्तर सामक का गायन कर रहे थे।
 
Indra and Lord Vishnu in the form of Vamana, both the sons of Aditi and Brahma were singing Rathantar Samaka in the presence of Lord Shiva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)