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mahabharat 13.15.389: चारों ओर से प्रमथगणों से घिरे हुए, अत्यंत तेजस्वी महादेव को बड़ी कठिनाई से देखा जा सकता था, जैसे परिधि से घिरे हुए शरद ऋतु के सूर्य को देखा जा सकता है।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 389
 
 
श्लोक  13.15.389 
प्रमथानां गणैश्चैव समन्तात् परिवारितम्।
शरदीव सुदुष्प्रेक्ष्यं परिविष्टं दिवाकरम्॥ ३८९॥
 
 
अनुवाद
चारों ओर से प्रमथगणों से घिरे हुए, अत्यंत तेजस्वी महादेव को बड़ी कठिनाई से देखा जा सकता था, जैसे परिधि से घिरे हुए शरद ऋतु के सूर्य को देखा जा सकता है।
 
Surrounded on all sides by the Pramathaganas, the extremely resplendent Mahadeva was seen with great difficulty, like the autumn Sun surrounded by a periphery. 389.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)