Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.388: उन्होंने अपनी छाती पर एक बहुरंगी दिव्य माला धारण की हुई थी, जो घुटनों तक लटक रही थी। जैसे शरद ऋतु में चंद्रमा को संध्या की लालिमा से घिरा हुआ देखा जाता है, वैसे ही मैंने उन महादेव को मालाओं से सुशोभित देखा। | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उन्होंने अपनी छाती पर एक बहुरंगी दिव्य माला धारण की हुई थी, जो घुटनों तक लटक रही थी। जैसे शरद ऋतु में चंद्रमा को संध्या की लालिमा से घिरा हुआ देखा जाता है, वैसे ही मैंने उन महादेव को मालाओं से सुशोभित देखा।
He wore a multi-coloured celestial garland on His chest, which hung down to His knees. Just as one sees the moon in the autumn season, surrounded by the redness of the evening, in the same way I saw that Lord Mahadeva, adorned with garlands.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥