श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 385
 
 
श्लोक  13.15.385 
रराज भगवांस्तत्र देव्या सह महेश्वर:।
सोमेन सहित: सूर्यो यथा मेघस्थितस्तथा॥ ३८५॥
 
 
अनुवाद
उस नील ज्योति में पार्वतीजी के साथ विराजमान भगवान महेश्वर ऐसे शोभायमान हो रहे थे मानो चन्द्रमा सहित सूर्य किसी काले बादल में निवास कर रहे हों ॥385॥
 
In that blue light, Lord Maheshwara seated with Goddess Parvati was looking so beautiful as if the Sun along with the Moon were residing within a dark cloud. ॥385॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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