श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 381
 
 
श्लोक  13.15.381 
तृतीयं च चतुर्थं च पञ्चमं चानिलाशन:।
एकपादेन तिष्ठंश्च ऊर्ध्वबाहुरतन्द्रित:॥ ३८१॥
 
 
अनुवाद
तीसरे, चौथे और पाँचवें महीने में मैं एक पैर पर खड़ा रहा और दोनों हाथ ऊपर उठाए रहा। मैंने आलस्य को अपने पास भी नहीं आने दिया। उन दिनों हवा ही मेरा एकमात्र भोजन थी। 381.
 
In the third, fourth and fifth months I stood on one leg with both arms raised up. I did not allow laziness to come near me. In those days air was my only food. 381.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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