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श्लोक 13.15.380  |
दण्डी मुण्डी कुशी चीरी घृताक्तो मेखलीकृत:।
मासमेकं फलाहारो द्वितीयं सलिलाशन:॥ ३८०॥ |
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| अनुवाद |
| उन्होंने मेरा सिर मुंडवा दिया, मेरे शरीर पर घी मल दिया और मुझे दण्ड, कुशा, वस्त्र और मेखला पहना दी। एक महीने तक मैं फल खाकर रहा और दूसरे महीने में केवल जल ग्रहण किया। |
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| He shaved my head, applied ghee on my body and made me wear a staff, kusha, cloth and belt. I lived on fruits for a month and in the second month I ate only water. |
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