श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 378-379
 
 
श्लोक  13.15.378-379 
एवं कथयतस्तस्य महादेवाश्रितां कथाम्॥ ३७८॥
दिनान्यष्टौ ततो जग्मुर्मुहूर्तमिव भारत।
दिनेऽष्टमे तु विप्रेण दीक्षितोऽहं यथाविधि॥ ३७९॥
 
 
अनुवाद
भरतनंदन! इस प्रकार महादेवजी की महिमा से संबंधित कथाएँ सुनाते हुए उस मुनि के आठ दिन क्षण भर के समान बीत गए। आठवें दिन श्रेष्ठ ब्राह्मण उपमन्यु ने विधिपूर्वक मुझे दीक्षा दी।
 
Bharatanandan! In this way, while narrating the tales related to the glory of Mahadevji, the eight days of that sage passed like a moment. On the eighth day, the great Brahmin Upmanyu initiated me according to the rituals.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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