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mahabharat 13.15.377-378h: श्रीकृष्ण कहते हैं - तब मैंने उनसे कहा - ब्रह्मन्! महामुने! आपके आशीर्वाद से मैं दैत्यों का नाश करने वाले भगवान महादेवजी का अवश्य दर्शन करूँगा। 377 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 377-378h
 
 
श्लोक  13.15.377-378h 
श्रीकृष्ण उवाच
अब्रुवं तमहं ब्रह्मंस्त्वत्प्रसादान्महामुने॥ ३७७॥
द्रक्ष्ये दितिजसंघानां मर्दनं त्रिदशेश्वरम्।
 
 
अनुवाद
श्रीकृष्ण कहते हैं - तब मैंने उनसे कहा - ब्रह्मन्! महामुने! आपके आशीर्वाद से मैं दैत्यों का नाश करने वाले भगवान महादेवजी का अवश्य दर्शन करूँगा। 377 1/2॥
 
Shri Krishna says – Then I told him – Brahman! Mahamune! With your blessings, I will definitely see Lord Mahadevji, the one who destroys the demons. 377 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)