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mahabharat 13.15.376-377h: तुम्हारे जैसे ब्राह्मण भक्त, सौम्य स्वभाव वाले और समर्पित व्यक्ति का संग देवताओं के लिए भी प्रशंसनीय है। मैं तुम्हें एक मंत्र देता हूँ, जिसके जाप से तुम भगवान शंकर के दर्शन करोगे। 376 1/2।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 376-377h
 
 
श्लोक  13.15.376-377h 
त्वादृशेन हि देवानां श्लाघनीय: समागम:।
ब्रह्मण्येनानृशंसेन श्रद्दधानेन चाप्युत॥ ३७६॥
जप्यं तु ते प्रदास्यामि येन द्रक्ष्यसि शंकरम्।
 
 
अनुवाद
तुम्हारे जैसे ब्राह्मण भक्त, सौम्य स्वभाव वाले और समर्पित व्यक्ति का संग देवताओं के लिए भी प्रशंसनीय है। मैं तुम्हें एक मंत्र देता हूँ, जिसके जाप से तुम भगवान शंकर के दर्शन करोगे। 376 1/2।
 
The company of a Brahmin devotee, gentle natured and devoted person like you is praiseworthy even for the gods. I will give you a mantra to chant, by which you will see Lord Shankar. 376 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)