श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 374
 
 
श्लोक  13.15.374 
अतीतानागतं चैव वर्तमानं च नित्यश:।
विदितं मे महाबाहो प्रसादात् तस्य धीमत:॥ ३७४॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! बुद्धिमान महादेवजी की कृपा से मुझे भूत, वर्तमान और भविष्य का ज्ञान सदैव बना रहता है ॥374॥
 
Mahabaho! By the grace of the wise Mahadevji I always have the knowledge of the past, present and future. ॥ 374॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)