श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 372
 
 
श्लोक  13.15.372 
चक्षुषा चैव दिव्येन पश्याम्यमितविक्रमम्।
षष्ठे मासि महादेवं द्रक्ष्यसे पुरुषोत्तम॥ ३७२॥
 
 
अनुवाद
पुरुषोत्तम! मैं दिव्य दृष्टि से देख रहा हूँ। आज से छठे महीने में तुम महाबली महादेवजी के दर्शन करोगे। 372।
 
Purushottam! I am seeing with divine sight. You will see the mighty Mahadevji in the sixth month from today. 372.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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