श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 371
 
 
श्लोक  13.15.371 
उपमन्युरुवाच
द्रक्ष्यसे पुण्डरीकाक्ष महादेवं न संशय:।
अचिरेणैव कालेन यथा दृष्टो मयानघ॥ ३७१॥
 
 
अनुवाद
उपमन्यु ने कहा - "भोले कमलनेत्र! जैसे मैंने भगवान् का दर्शन किया है, वैसे ही तुम्हें भी थोड़े ही समय में महादेवजी का दर्शन हो जाएगा; इसमें कोई संदेह नहीं है।"
 
Upamanyu said, "Innocent lotus-eyed one! Just as I have seen the Lord, in the same way you too will get the sight of Mahadevji in a short time; there is no doubt about this." 371.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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