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mahabharat 13.15.369: विप्रवर! आप धन्य हैं। आपसे बढ़कर पुण्यात्मा कौन है? क्योंकि आपके आश्रम में स्वयं परमपिता परमेश्वर महादेव विराजमान हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.369 
धन्यस्त्वमसि विप्रेन्द्र कस्त्वदन्योऽसि पुण्यकृत्।
यस्य देवाधिदेवस्ते सांनिध्यं कुरुतेऽऽश्रमे॥ ३६९॥
 
 
अनुवाद
विप्रवर! आप धन्य हैं। आपसे बढ़कर पुण्यात्मा कौन है? क्योंकि आपके आश्रम में स्वयं परमपिता परमेश्वर महादेव विराजमान हैं।
 
Vipravar! You are blessed. Who is more pious than you? Because the Supreme God Mahadev himself resides in your ashram.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)