श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 367
 
 
श्लोक  13.15.367 
सर्वमेतन्महाबाहो दिव्यभावसमन्वितम्।
प्रसादाद् देवदेवस्य ईश्वरस्य महात्मन:॥ ३६७॥
 
 
अनुवाद
महाबाहो! देवाधिदेव और सबके स्वामी महात्मा शिव की कृपा से ही यहाँ सब कुछ दिव्य रीति से सम्पन्न होता हुआ प्रतीत होता है ॥367॥
 
Mahabaho! It is only by the grace of Mahatma Shiva, the god of gods and the Lord of all, that everything here appears to be accomplished in a divine manner. ॥ 367॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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