श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 366
 
 
श्लोक  13.15.366 
पश्य वृक्षलतागुल्मान् सर्वपुष्पफलप्रदान्।
सर्वर्तुकुसुमैर्युक्तान् सुखपत्रान् सुगन्धिन:॥ ३६६॥
 
 
अनुवाद
देखो, यहाँ के वृक्ष, लताएँ और झाड़ियाँ सब प्रकार के फूल और फल देती हैं। वे सब ऋतुओं के फूलों से सुशोभित हैं, सुन्दर पत्तों वाले हैं और सुगन्ध से परिपूर्ण हैं ॥366॥
 
See, the trees, creepers and bushes here bear all kinds of flowers and fruits. They are adorned with flowers of all seasons, have pleasant leaves and are full of fragrance. ॥ 366॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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