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mahabharat 13.15.357: मेरी कृपा से तुम मुनियों को भी दर्शनीय और आदरणीय होगे तथा सदा विनम्र, सदाचारी, सर्वज्ञ और प्रिय रहोगे ॥357॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 357
 
 
श्लोक  13.15.357 
ऋषीणामभिगम्यश्च मत्प्रसादाद् भविष्यसि।
शीलवान् गुणसम्पन्न: सर्वज्ञ: प्रियदर्शन:॥ ३५७॥
 
 
अनुवाद
मेरी कृपा से तुम मुनियों को भी दर्शनीय और आदरणीय होगे तथा सदा विनम्र, सदाचारी, सर्वज्ञ और प्रिय रहोगे ॥357॥
 
By my grace, you will be visible and respected even to the sages and will always remain polite, virtuous, omniscient and beloved. 357॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)