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mahabharat 13.15.356: भगवान शिव ने कहा- ब्रह्मन्! तुम अमर हो जाओ और शोक से मुक्त हो जाओ। यशस्वी, तेजस्वी और दिव्य ज्ञान से युक्त रहो। 356॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 356
 
 
श्लोक  13.15.356 
श्रीभगवानुवाच
अजरश्चामरश्चैव भव त्वं दु:खवर्जित:।
यशस्वी तेजसा युक्तो दिव्यज्ञानसमन्वित:॥ ३५६॥
 
 
अनुवाद
भगवान शिव ने कहा- ब्रह्मन्! तुम अमर हो जाओ और शोक से मुक्त हो जाओ। यशस्वी, तेजस्वी और दिव्य ज्ञान से युक्त रहो। 356॥
 
Lord Shiva said-Brahman! May you become immortal and free from sorrow. Remain successful, brilliant and full of divine knowledge. 356॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)