श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 355
 
 
श्लोक  13.15.355 
एवमुक्त: स मां प्राह भगवाँल्लोकपूजित:।
महेश्वरो महातेजाश्चराचरगुरु: शिव:॥ ३५५॥
 
 
अनुवाद
मेरे ऐसा कहने पर समस्त प्राणियों के गुरु पूज्य एवं शक्तिशाली महेश्वर भगवान शिव मुझसे इस प्रकार बोले - ॥355॥
 
Upon my saying this, the revered and powerful Maheshwar Lord Shiva, who is the guru of all living beings, spoke to me thus - ॥ 355॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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