श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 353
 
 
श्लोक  13.15.353 
अतीतानागतं चैव वर्तमानं च यद् विभो।
जानीयामिति मे बुद्धि: प्रसादात् सुरसत्तम॥ ३५३॥
 
 
अनुवाद
सुरश्रेष्ठ! विभो! आपकी कृपा से मैं भूत, वर्तमान और भविष्य को जान सकता हूँ; यह मेरा निश्चय है ॥353॥
 
Surashrestha! Vibho! By your grace I can know the past, present and future; This is my determination. 353॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)