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mahabharat 13.15.352: प्रभु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं और मुझे वर देने की इच्छा रखते हैं, तो हे प्रभु! हे सुरेश्वर! मेरी आपके प्रति सदैव भक्ति बनी रहे॥352॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 352
 
 
श्लोक  13.15.352 
यदि देयो वरो मह्यं यदि तुष्टोऽसि मे प्रभो।
भक्तिर्भवतु मे नित्यं त्वयि देव सुरेश्वर॥ ३५२॥
 
 
अनुवाद
प्रभु! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं और मुझे वर देने की इच्छा रखते हैं, तो हे प्रभु! हे सुरेश्वर! मेरी आपके प्रति सदैव भक्ति बनी रहे॥352॥
 
Prabhu! If you are pleased with me and wish to grant me a boon, then O Lord! O Sureshwar! May my devotion towards you always remain.॥ 352॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)