श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 350
 
 
श्लोक  13.15.350 
एष देवो महादेवो जगत‍् सृष्ट्वा चराचरम्।
कल्पान्ते चैव सर्वेषां स्मृतिमाक्षिप्य तिष्ठति॥ ३५०॥
 
 
अनुवाद
यही भगवान महादेव जगत् की रचना करके सबकी स्मरणशक्ति मिटाकर स्वयं कल्प में विद्यमान रहते हैं ॥350॥
 
‘This same God, Mahadev, after creating the world, remains present in Kalpa by himself after erasing everyone's memory power. 350॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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