श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  13.15.35 
इत्येवं चोदितो देव्या तामवोचं सुमध्यमाम्।
अनुजानीहि मां राज्ञि करिष्ये वचनं तव॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
देवी जाम्बवती की प्रेरणा से मैंने उस सुन्दरी से कहा - 'महारानी! मुझे जाने की अनुमति दीजिए। मैं आपकी प्रार्थना पूरी करूँगा।'
 
Upon Devi Jambavati's inspiration, I said to that beautiful lady - 'Queen! Please allow me to go. I will fulfill your request.'
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas