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श्लोक 13.15.349  |
कालो भूत्वा महातेजा: संवर्तक इवानल:।
युगान्ते सर्वभूतानि ग्रसन्निव व्यवस्थित:॥ ३४९॥ |
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| अनुवाद |
| वह महान तेजोमय काल होने के कारण कल्प के अन्त में प्रलयकाल की अग्नि के समान सम्पूर्ण प्राणियों को भस्म करता हुआ स्थित रहता है॥349॥ |
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| Being the great effulgent time, at the end of a kalpa he resides like the fire at the time of doomsday, devouring all living beings.॥ 349॥ |
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