Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.15.349: वह महान तेजोमय काल होने के कारण कल्प के अन्त में प्रलयकाल की अग्नि के समान सम्पूर्ण प्राणियों को भस्म करता हुआ स्थित रहता है॥349॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 349
 
 
श्लोक  13.15.349 
कालो भूत्वा महातेजा: संवर्तक इवानल:।
युगान्ते सर्वभूतानि ग्रसन्निव व्यवस्थित:॥ ३४९॥
 
 
अनुवाद
वह महान तेजोमय काल होने के कारण कल्प के अन्त में प्रलयकाल की अग्नि के समान सम्पूर्ण प्राणियों को भस्म करता हुआ स्थित रहता है॥349॥
 
Being the great effulgent time, at the end of a kalpa he resides like the fire at the time of doomsday, devouring all living beings.॥ 349॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)