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mahabharat 13.15.348: जब प्रलयकाल आया, तब इन्हीं भगवान शिव ने रुद्र को उत्पन्न किया। ये रुद्र ही सम्पूर्ण चर-अचर जगत् का नाश करते हैं॥348॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 348
 
 
श्लोक  13.15.348 
युगान्ते चैव सम्प्राप्ते रुद्रमीशोऽसृजत् प्रभु:।
स रुद्र: संहरन् कृत्स्नं जगत‍् स्थावरजङ्गमम्॥ ३४८॥
 
 
अनुवाद
जब प्रलयकाल आया, तब इन्हीं भगवान शिव ने रुद्र को उत्पन्न किया। ये रुद्र ही सम्पूर्ण चर-अचर जगत् का नाश करते हैं॥348॥
 
‘When the time of deluge arrived, this very Lord Shiva created Rudra. It is this Rudra who destroys the entire animate and inanimate world.॥ 348॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)