श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 347
 
 
श्लोक  13.15.347 
योऽसृजद् दक्षिणादङ्गाद् ब्रह्माणं लोकसम्भवम्।
वामपार्श्वात् तथा विष्णुं लोकरक्षार्थमीश्वर:॥ ३४७॥
 
 
अनुवाद
‘इन जगदीश्वर ने अपने दाहिने हाथ से जगत् के रचयिता ब्रह्मा को और बायें हाथ से जगत् की रक्षा के लिए विष्णु को उत्पन्न किया है ॥347॥
 
‘This Jagdishwar has created Brahma, the creator of the world, from his right hand and Vishnu for the protection of the world from his left hand. 347॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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