श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 346
 
 
श्लोक  13.15.346 
स एष भगवान‍् देव: सर्वसत्त्वादिरव्यय:।
सर्वतत्त्वविधानज्ञ: प्रधानपुरुष: पर:॥ ३४६॥
 
 
अनुवाद
जो सम्पूर्ण प्राणियों के मूल कारण हैं, अविनाशी हैं, सम्पूर्ण तत्त्वों के नियम को जानने वाले हैं और परम पुरुष हैं, वे भगवान महादेवजी ही हैं ॥346॥
 
The one who is the original cause of all living beings, the indestructible, the knower of the law of all elements and the supreme supreme being, is this Lord Mahadevji. 346॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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