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mahabharat 13.15.342: तब मैंने भूमि पर घुटने टेककर भगवान् को बारंबार प्रणाम किया और हर्षपूर्वक महादेवजी से इस प्रकार कहा -॥342॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 342
 
 
श्लोक  13.15.342 
अब्रुवं च तदा देवं हर्षगद्‍गदया गिरा।
जानुभ्यामवनीं गत्वा प्रणम्य च पुन: पुन:॥ ३४२॥
 
 
अनुवाद
तब मैंने भूमि पर घुटने टेककर भगवान् को बारंबार प्रणाम किया और हर्षपूर्वक महादेवजी से इस प्रकार कहा -॥342॥
 
Then I knelt down on the ground and bowed down before the Lord again and again, and with joyful words spoke to Mahadevji as follows -॥ 342॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)