श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 336
 
 
श्लोक  13.15.336 
एवमुक्तास्तदा कृष्ण सुरास्ते शूलपाणिना।
ऊचु: प्राञ्जलय: सर्वे नमस्कृत्वा वृषध्वजम्॥ ३३६॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण! शूलपाणि महादेवजी के ऐसा कहने पर सब देवताओं ने हाथ जोड़कर भगवान शिव को प्रणाम किया और कहा- 336॥
 
Sri Krishna! When Shulpani Mahadevji said this, all the gods folded their hands and saluted Lord Shiva and said - 336॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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