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श्लोक 13.15.336  |
एवमुक्तास्तदा कृष्ण सुरास्ते शूलपाणिना।
ऊचु: प्राञ्जलय: सर्वे नमस्कृत्वा वृषध्वजम्॥ ३३६॥ |
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| अनुवाद |
| श्री कृष्ण! शूलपाणि महादेवजी के ऐसा कहने पर सब देवताओं ने हाथ जोड़कर भगवान शिव को प्रणाम किया और कहा- 336॥ |
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| Sri Krishna! When Shulpani Mahadevji said this, all the gods folded their hands and saluted Lord Shiva and said - 336॥ |
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