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mahabharat 13.15.335: हे देवताओं! आप सब लोग मुझमें निरन्तर और अनन्यभाव से समर्पित महात्मा उपमन्यु की उत्तम भक्ति को देखिये। ॥335॥   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 335
 
 
श्लोक  13.15.335 
पश्यध्वं त्रिदशा: सर्वे उपमन्योर्महात्मन:।
मयि भक्तिं परां नित्यमेकभावादवस्थिताम्॥ ३३५॥
 
 
अनुवाद
हे देवताओं! आप सब लोग मुझमें निरन्तर और अनन्यभाव से समर्पित महात्मा उपमन्यु की उत्तम भक्ति को देखिये। ॥335॥
 
"O Gods! All of you see the excellent devotion of the great soul Upamanyu towards me which remains constant and single-mindedly devoted to me." ॥ 335॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)