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mahabharat 13.15.334: तब प्रसन्न वृषभध्वज महादेवजी ने अपनी पत्नी सहित मेरा आनन्द बढ़ाते हुए वहाँ उपस्थित समस्त देवताओं से कहा -   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 334
 
 
श्लोक  13.15.334 
तत: प्रीतो महादेव: सपत्नीको वृषध्वज:।
अब्रवीत् त्रिदशांस्तत्र हर्षयन्निव मां तदा ॥ ३३४ ॥
 
 
अनुवाद
तब प्रसन्न वृषभध्वज महादेवजी ने अपनी पत्नी सहित मेरा आनन्द बढ़ाते हुए वहाँ उपस्थित समस्त देवताओं से कहा -
 
Then the pleased Vrishabhadhwaj Mahadevji along with his wife, increasing my joy, said to all the gods present there -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)