Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.15.332-333: तत्पश्चात् मेरे सिर पर शीतल जल और दिव्य सुगन्धित पुष्पों की मंगलमयी वर्षा होने लगी। उसी समय देवकिंकर दिव्य दुन्दुभी बजाने लगे और पवित्र सुगन्धयुक्त पुण्यमयी सुखद वायु बहने लगी। 332-333॥ | mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् मेरे सिर पर शीतल जल और दिव्य सुगन्धित पुष्पों की मंगलमयी वर्षा होने लगी। उसी समय देवकिंकर दिव्य दुन्दुभी बजाने लगे और पवित्र सुगन्धयुक्त पुण्यमयी सुखद वायु बहने लगी। 332-333॥
Tat! Thereafter, an auspicious rain of cool water and divinely scented flowers started falling on my head. At the same time the Devkinkars started playing the divine dundubhi and a virtuous and pleasant breeze with sacred fragrance started blowing. 332-333॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥