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mahabharat 13.15.331-332h: इस प्रकार भगवान शिव की स्तुति करके मैंने भक्तिपूर्वक उन्हें जल-जल अर्पित किया और फिर हाथ जोड़कर अपनी सारी वस्तुएं अर्पित कर दीं।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 331-332h
 
 
श्लोक  13.15.331-332h 
एवं स्तुत्वाहमीशानं पाद्यमर्घ्यं च भक्तित:॥ ३३१॥
कृताञ्जलिपुटो भूत्वा सर्वं तस्मै न्यवेदयम्।
 
 
अनुवाद
इस प्रकार भगवान शिव की स्तुति करके मैंने भक्तिपूर्वक उन्हें जल-जल अर्पित किया और फिर हाथ जोड़कर अपनी सारी वस्तुएं अर्पित कर दीं।
 
Having thus praised Lord Shiva, I offered Him water and water with devotion. Then with folded hands I offered Him everything I had.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)