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mahabharat 13.15.330-331h: देवेश्वर! आपने अपना रूप बदलकर मुझे मोहित कर लिया है। महेश्वर! इसीलिए मैंने न तो आपको जल अर्पित किया और न ही जल ग्रहण किया।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 330-331h
 
 
श्लोक  13.15.330-331h 
मोहितश्चास्मि देवेश त्वया रूपविपर्ययात्॥ ३३०॥
नार्घ्यं ते न मया दत्तं पाद्यं चापि महेश्वर।
 
 
अनुवाद
देवेश्वर! आपने अपना रूप बदलकर मुझे मोहित कर लिया है। महेश्वर! इसीलिए मैंने न तो आपको जल अर्पित किया और न ही जल ग्रहण किया।
 
Deveshwar! You have changed your form and enchanted me. Maheshwar! That is why I neither offered you water nor water to you. 330 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)