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mahabharat 13.15.329-330h: हे परमप्रभु! यह मेरा भक्त है, यह समझकर कि मैंने अनजाने में जो भी पाप किये हों, कृपया उन्हें क्षमा कर दीजिए। 329 1/2   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 329-330h
 
 
श्लोक  13.15.329-330h 
यच्चापराधं कृतवानज्ञात्वा परमेश्वर॥ ३२९॥
मद्भक्त इति देवेश तत् सर्वं क्षन्तुमर्हसि।
 
 
अनुवाद
हे परमप्रभु! यह मेरा भक्त है, यह समझकर कि मैंने अनजाने में जो भी पाप किये हों, कृपया उन्हें क्षमा कर दीजिए। 329 1/2
 
O Supreme Lord! Please forgive me for all the sins I may have committed unknowingly, considering that this person is my own devotee. 329 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)