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mahabharat 13.15.327-328h: भगवान! देव! आपको नमस्कार है। हे भक्त-प्रेमी! आपको नमस्कार है। योगेश्वर! आपको नमस्कार है। जगत की उत्पत्ति के कारण! आपको नमस्कार है। 327 1/2।   |   mahabharat अध्याय 13.15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.15.327-328h 
नमस्ते भगवन् देव नमस्ते भक्तवत्सल॥ ३२७॥
योगेश्वर नमस्तेऽस्तु नमस्ते विश्वसम्भव।
 
 
अनुवाद
भगवान! देव! आपको नमस्कार है। हे भक्त-प्रेमी! आपको नमस्कार है। योगेश्वर! आपको नमस्कार है। जगत की उत्पत्ति के कारण! आपको नमस्कार है। 327 1/2।
 
Bhagwan! Dev! I salute you. O devotee-loving one! I salute you. Yogeshwar! I salute you. Because of the origin of the world! I salute you. 327 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)