श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 15: भीष्मजीकी आज्ञासे भगवान‍् श्रीकृष्णका युधिष्ठिरसे महादेवजीके माहात्म्यकी कथामें उपमन्युद्वारा महादेवजीकी स्तुति-प्रार्थना, उनके दर्शन और वरदान पानेका तथा अपनेको दर्शन प्राप्त होनेका कथन  »  श्लोक 324
 
 
श्लोक  13.15.324 
शक्रोऽसि मरुतां देव पितॄणां हव्यवाडसि।
ब्रह्मलोकश्च लोकानां गतीनां मोक्ष उच्यसे॥ ३२४॥
 
 
अनुवाद
हे भगवन्! आप मरुभूमिवासियों में इन्द्र, पितरों में यज्ञ का वाहन अग्नि, लोकों में ब्रह्मलोक और गतियों में मोक्ष कहलाते हैं।
 
God! You are called Indra among the desert people, Agni the vehicle of sacrifice among the ancestors, Brahmaloka among the worlds and Moksha among the gatis.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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